दूसरी शादी — संवेदनशील विषय। कुंडली में 7वें भाव, सप्तमेश के दोहरे प्रभाव से इसके योग देखे जाते हैं।...
दूसरी शादी — संवेदनशील विषय। कुंडली में 7वें भाव, सप्तमेश के दोहरे प्रभाव से इसके योग देखे जाते हैं।
7वें भाव में पाप ग्रह (तलाक/विधवापन)। शुक्र पीड़ित। 7वें में 2 ग्रह। नवांश 7वें में अनेक ग्रह। द्विस्वभाव लग्न।
7वें भाव में मांगलिक मंगल। शनि (विलंब/अलगाव)। राहु (अप्रत्याशित अंत)। 8वें भाव में मंगल।
शुक्र की दशा (पुनर्विवाह)। 7वें भाव में दूसरे ग्रह की दशा। 2 ग्रहों में दूसरे की दशा।
नवांश के 7वें भाव से दूसरा जीवनसाथी का स्वरूप। पहली से अधिक परिपक्व/आध्यात्मिक हो सकता है।
केवल कुंडली देखकर निर्णय न लें। पहले संबंध सुधारने के प्रयास। उपायों से बचाव। फिर भी निर्णय आवश्यक हो तो शास्त्र विधि से।