होली रंगों का त्योहार और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक। ज्योतिषीय दृष्टि से, होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा और अनिष्ट को जलाने का कार्य करती ...
होली रंगों का त्योहार और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक। ज्योतिषीय दृष्टि से, होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा और अनिष्ट को जलाने का कार्य करती है।
होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाती है — जब चंद्रमा पूर्ण होता है। यह दिन भक्त प्रह्लाद की हिरण्यकशिपु पर विजय का प्रतीक। होलिका दहन की अग्नि घर और मन की नकारात्मकता को जलाने का अवसर है।
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात की जाती है — परंतु 'भद्रा काल' से बचना चाहिए। शुभ समय 'प्रदोष काल' के बाद और मध्यरात्रि से पहले। चंद्र-दीप्ति की किरणें होलिका के साथ मिलकर शुद्धिकरण करती हैं।
मेष: अग्नि तत्व प्रबल — साहसिक कार्य। वृषभ: मधुर संबंध। मिथुन: संवाद का त्योहार। कर्क: पारिवारिक एकता। सिंह: नेतृत्व क्षण। कन्या: सेवा भाव से होली। तुला: कलात्मक रंग। वृश्चिक: गहरे संबंध। धनु: यात्रा शुभ। मकर: अनुशासित उत्सव। कुंभ: सामाजिक एकता। मीन: आध्यात्मिक रंग।
होलिका में नारियल अर्पित करें। गुड़ डालकर शनि शांति। काली तिल से राहु-केतु शांति। हल्दी डालकर बृहस्पति। कपूर से सूर्य शांति। होली के दिन गरीबों को रंग दान।
नरसिंह मंत्र: 'ॐ नृसिंहाय नमः' होलिका दहन के समय। शनि मंत्र: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः'। राधा-कृष्ण मंत्र: 'राधे-कृष्ण राधे-कृष्ण'।