करवा चौथ सुहागिन स्त्रियों का सबसे महत्वपूर्ण व्रत — पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिए। ज्योतिषीय दृष्टि से, यह व्रत चंद्रमा (मन और पति-कारक) की कृपा ...
करवा चौथ सुहागिन स्त्रियों का सबसे महत्वपूर्ण व्रत — पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिए। ज्योतिषीय दृष्टि से, यह व्रत चंद्रमा (मन और पति-कारक) की कृपा से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। चंद्रमा वैदिक ज्योतिष में मन, माता और पत्नी के सुख का कारक है। इस दिन व्रत और चंद्र दर्शन से चंद्र दोष शांत होते हैं।
करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण क्षण है चंद्रोदय। यह रात्रि 8 से 9 बजे के बीच होता है (स्थान अनुसार बदलता है)। चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखकर अर्घ्य दान करें।
सूर्योदय से पहले सरगी (सास द्वारा दी गई)। दिन भर निर्जला व्रत। संध्या समय करवा माता की पूजा। चंद्रोदय पर अर्घ्य — मिट्टी का करवा (पात्र), घी का दीपक, सिंदूर, मेहंदी, सोलह श्रृंगार।
मेष नारियां: साहसी रहें — विवाद टालें। वृषभ: मधुर वाणी। मिथुन: संवाद का व्रत। कर्क: मानसिक शांति। सिंह: आत्मविश्वास से व्रत। कन्या: सेवा-भाव। तुला: सौंदर्य प्रसाधन। वृश्चिक: गहन आराधना। धनु: व्यापक सोच। मकर: अनुशासित व्रत। कुंभ: नवीन रीतियां। मीन: आध्यात्मिक भाव।
चंद्रमा को दूध-चावल अर्घ्य। शुक्र मंत्र: 'ॐ शुं शुक्राय नमः'। पति के दीर्घायु के लिए: 'ॐ नमः शिवाय शिव शक्ति स्वरूपिणे'। पत्नी की रक्षा के लिए शिव-पार्वती पूजन।