कुंडली में कई दोष हो सकते हैं — मांगलिक, काल सर्प, साडे साती, पितृ दोष, नाडी दोष आदि। प्रत्येक का अलग प्रभाव और उपाय है।...
कुंडली में कई दोष हो सकते हैं — मांगलिक, काल सर्प, साडे साती, पितृ दोष, नाडी दोष आदि। प्रत्येक का अलग प्रभाव और उपाय है।
मंगल यदि 1, 2, 4, 7, 8, या 12वें भाव में हो — व्यक्ति मांगलिक। विवाह में देरी, संघर्ष। उपाय: हनुमान चालीसा, मंगलवार व्रत, कुंभ विवाह।
जब सभी 7 ग्रह राहु-केतु के बीच हों — काल सर्प दोष। 12 प्रकार के होते हैं। जीवन में संघर्ष, बाधाएं। उपाय: नाग पंचमी पूजा, राहु-केतु मंत्र, त्र्यंबकेश्वर/कालहस्ती में पूजा।
शनि का चंद्र राशि से 12-1-2 भावों में 7.5 वर्ष का गोचर। कठिनाई, धैर्य की परीक्षा। उपाय: हनुमान चालीसा, शनिवार दान, तिल-तेल दीप।
9वें भाव में सूर्य-राहु/केतु का संबंध — पितृ दोष। पारिवारिक समस्याएं, संतान बाधा। उपाय: श्राद्ध, ब्राह्मण भोज, पीपल पूजा, गया श्राद्ध।
विवाह के लिए — कुंडली मिलान में आदि-मध्य-अंत्य नाडी मेल। एक नाडी विवाह स्वास्थ्य-संतान बाधा। उपाय: ग्रहों के दान, मंत्र जप, विशेष पूजा।
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