भाग्योदय का अर्थ है किस्मत का चमकना — कुंडली के 9वें भाव (भाग्य), गुरु, और दशाओं से इसका समय निर्धारित होता है।...
भाग्योदय का अर्थ है किस्मत का चमकना — कुंडली के 9वें भाव (भाग्य), गुरु, और दशाओं से इसका समय निर्धारित होता है।
9वां भाव — भाग्य स्थान। 9वें का स्वामी (भाग्येश)। गुरु — भाग्य कारक ग्रह। लग्नेश की स्थिति। 5वां भाव — पूर्व जन्म पुण्य। 11वां भाव — लाभ।
भाग्योदय का सामान्य समय कुंडली में स्पष्ट होता है। कुछ की 25 के बाद, कुछ की 30+, कुछ की 35+ या 40+। 9वें भाव में शुभ ग्रह तो जल्दी, पाप ग्रह तो विलंब से।
गुरु की महादशा, 9वें स्वामी की दशा, 9वें भाव में स्थित ग्रह की दशा — ये भाग्योदय के मुख्य काल। साडे साती की समाप्ति के बाद भी भाग्य उदय होता है।
बृहस्पति का गोचर 9वें भाव, 5वें भाव, या लग्न पर शुभ। शनि का 10वें/11वें में आगमन कर्म के बाद फल देता है। राहु-केतु का परिवर्तन भी जीवन मोड़ देता है।
गुरुवार को व्रत, केले की पूजा, हल्दी का दान। 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः'। पीले वस्त्र, पीला भोजन। गायत्री मंत्र। पीपल वृक्ष की रोज प्रदक्षिणा।
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