आयु का निर्धारण कुंडली से होता है — परंतु यह संवेदनशील विषय है। आयु अनुमान ही दिया जा सकता है, सटीक नहीं।...
आयु का निर्धारण कुंडली से होता है — परंतु यह संवेदनशील विषय है। आयु अनुमान ही दिया जा सकता है, सटीक नहीं।
लग्न और लग्नेश (शरीर), 8वां भाव (आयु स्थान), अष्टमेश, चंद्र की स्थिति, मारकेश ग्रह — ये मुख्य कारक हैं।
अल्पायु (32 वर्ष तक), मध्यायु (32-64 वर्ष), दीर्घायु (64+)। यह सामान्य वर्गीकरण है, सटीक नहीं।
8वें भाव में शुभ ग्रह, बलवान लग्नेश, शनि की केंद्र-त्रिकोण में स्थिति, चंद्र का बल — दीर्घायु के संकेत।
ज्योतिष आयु के संकेत देता है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली, चिकित्सा, और आध्यात्मिकता से आयु बढ़ती है। नियमित योग और मेडिटेशन करें।
आयु के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र: 'ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्'। दिन में 108 बार जाप।