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नवरात्रि ज्योतिष

नवरात्रि — माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के नौ दिन। ज्योतिषीय दृष्टि से, ये नौ दिन ग्रह दोष शांति, शक्ति संचय और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष...

नवरात्रि — माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के नौ दिन। ज्योतिषीय दृष्टि से, ये नौ दिन ग्रह दोष शांति, शक्ति संचय और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ।

नवरात्रि का ज्योतिषीय महत्व

नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है — चैत्र (मार्च-अप्रैल) और शारदीय (सितंबर-अक्टूबर)। ये नौ दिन ब्रह्मांड में देवी ऊर्जा का प्रकटीकरण समय हैं। प्रत्येक दिन एक ग्रह की शांति और एक देवी की उपासना।

9 देवियां और 9 ग्रह

दिन 1 शैलपुत्री (चंद्र), दिन 2 ब्रह्मचारिणी (मंगल), दिन 3 चंद्रघंटा (शुक्र), दिन 4 कूष्माण्डा (सूर्य), दिन 5 स्कंदमाता (बुध), दिन 6 कात्यायनी (बृहस्पति), दिन 7 कालरात्रि (शनि), दिन 8 महागौरी (राहु), दिन 9 सिद्धिदात्री (केतु)।

घटस्थापना शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) अत्यंत महत्वपूर्ण। शुभ समय: सूर्योदय के तुरंत बाद 'अभिजित मुहूर्त' तक। 'द्विस्वभाव लग्न' (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) उत्तम।

सभी राशियों के लिए नवरात्रि उपाय

मेष: लाल वस्त्र पहनकर मां दुर्गा पूजा। वृषभ: सफेद वस्त्र, माता को मिश्री। मिथुन: हरे वस्त्र, माता को तुलसी। कर्क: सफेद वस्त्र, माता को चावल। सिंह: सुनहरे/लाल वस्त्र, माता को गुड़। कन्या: हरे वस्त्र, माता को मेथी। तुला: पीला वस्त्र, माता को केले। वृश्चिक: लाल वस्त्र, माता को सिंदूर। धनु: पीले वस्त्र, माता को हल्दी। मकर: नीले वस्त्र, माता को तिल। कुंभ: नीले वस्त्र, माता को कमल। मीन: पीले वस्त्र, माता को हल्दी।

दुर्गा मंत्र और साधना

मूल मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। दुर्गा सप्तशती पाठ। 'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता'। उपवास, ब्रह्मचर्य, सत्य भाषण नौ दिन।