शनि — कर्मफल देने वाला, धीमी गति का सबसे शक्तिशाली ग्रह। कुंडली में शनि की स्थिति जीवन में परिश्रम-सफलता तय करती है।...
शनि — कर्मफल देने वाला, धीमी गति का सबसे शक्तिशाली ग्रह। कुंडली में शनि की स्थिति जीवन में परिश्रम-सफलता तय करती है।
धीमा, अनुशासित, न्यायप्रिय। कर्म का देवता। दूर तक देखने वाला। दीर्घायु का कारक। पुरानी चीजें, गरीब, सेवक, मजदूर।
उच्च तुला (Libra) में। केंद्र (4, 7, 10) में। 6-11 भाव में। अपनी राशि मकर/कुंभ में। शनि की दृष्टि शुभ ग्रहों पर।
नीच मेष (Aries) में। 1/2/5 भाव में पाप ग्रह संग। दृष्टि शुभ ग्रहों पर अशुभ। अस्त (सूर्य से 30° पास)।
अच्छा — अनुशासन, स्थायित्व, दीर्घायु, गहरी सोच, सेवा। बुरा — विलंब, बाधा, अवसाद, अकेलापन, कठिनाई।
हनुमान चालीसा। शनिवार व्रत। काले तिल, सरसों तेल, काला कपड़ा दान। नीला रत्न (कुंडली अनुसार)। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः'।