विदेश यात्रा का योग कुंडली के 12वें भाव (विदेश स्थान), 9वें भाव (दूर यात्रा), राहु-चंद्र की स्थिति से देखा जाता है।...
विदेश यात्रा का योग कुंडली के 12वें भाव (विदेश स्थान), 9वें भाव (दूर यात्रा), राहु-चंद्र की स्थिति से देखा जाता है।
12वां भाव — विदेश, दूर देश, अंतरराष्ट्रीय। 9वां भाव — लंबी यात्रा, भाग्य। 7वां भाव — व्यापार, साझेदारी से विदेश। राहु — विदेशी, अप्रत्याशित। चंद्र — गति, यात्रा।
(1) 12वें स्वामी का 9वें/10वें में होना (2) राहु का 12वें भाव में होना (3) चंद्र का 9वें भाव में होना (4) लग्नेश का 12वें में होना (5) 9वें-12वें भाव स्वामियों का परिवर्तन
10वें भाव का स्वामी 12वें में हो तो विदेश में नौकरी। बुध-राहु संबंध IT/सॉफ्टवेयर विदेश। मंगल-शनि-राहु से कंस्ट्रक्शन/शिप विदेश। शुक्र-राहु से ग्लैमर/मीडिया विदेश।
12वें स्वामी और 4थे भाव (मातृभूमि) के स्वामी का परिवर्तन या स्थान बदलने का योग — स्थायी विदेश निवास का संकेत। ग्रीन कार्ड/PR की संभावना।
गणेश पूजा यात्रा से पहले। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र 108 बार। मां सरस्वती की पूजा (शिक्षा हेतु विदेश)। हनुमान चालीसा। नीला घोड़े की नाल घर पर।
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